Saturday, March 22, 2025

World Water Day - 2025



Water Management and Wastage in Ghaziabad: A Call for Conservation

On this World Water Day, it's crucial to address the growing water crisis in Ghaziabad, Uttar Pradesh. The city's rapid urbanization and industrialization have significantly increased water demand, leading to depletion and pollution of water sources. Despite government efforts, inefficient water management and wastage remain major concerns.

Water Wastage and Management Issues in Ghaziabad

Ghaziabad relies heavily on groundwater for domestic and industrial use, but excessive extraction has caused water tables to drop alarmingly. Additionally, poor sewage treatment leads to contamination of the Hindon River, a crucial water source. Water wastage is another problem, with leaking pipes, inefficient irrigation, and lack of rainwater harvesting systems exacerbating the crisis.

Municipal efforts include setting up sewage treatment plants (STPs) and promoting water conservation programs. However, challenges such as inadequate infrastructure, public negligence, and pollution from industries hinder progress. If these issues persist, Ghaziabad could face severe water shortages in the near future.

How Individuals Can Help Conserve Water

While large-scale improvements are necessary, individual efforts can make a significant impact. Here’s what residents can do to help:

1. Fix Leaks: A single dripping tap can waste thousands of liters annually. Regular maintenance of plumbing systems can prevent unnecessary wastage.

2. Use Water-Efficient Appliances: Installing low-flow faucets, dual-flush toilets, and water-efficient washing machines can reduce consumption.

3. Practice Responsible Usage: Simple habits like turning off taps while brushing, taking shorter showers, and using a bucket instead of a hose for washing vehicles can save water.

4. Harvest Rainwater: Setting up rainwater harvesting systems in homes and apartments can help replenish groundwater.

5. Reuse Greywater: Water from washing machines and kitchen sinks can be used for gardening or cleaning.

6. Educate and Spread Awareness: Encouraging neighbors and communities to adopt water-saving habits can amplify conservation efforts.

Conclusion

Ghaziabad's water crisis is a growing concern, but collective action can help mitigate the problem. On this World Water Day, let’s pledge to be more responsible in our water usage. Small changes in our daily habits can create a lasting impact, ensuring a sustainable water supply for future generations.

Let’s start conserving today—because every drop counts!

Regards



Praveen Chaudhary
President, Vyaapak Foundation

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Sunday, February 11, 2024

सफल होने के लिए ऐसे करें दिन की शुरुआत


अगर आप भी जीवन में सफल होना चाहते हैं तो यह लेख आपके बहुत काम आ सकता है | सफल होने के लिए ज़रूरी है कि हम अपने दिन की शुरुआत सफल तरीके से करें | अंग्रेजी में कहा जाता है कि "Well begun is half done", यानी अगर आप किसी काम की शुरुआत अच्छे तरीके से करते हैं तो आधी बाज़ी जीत जाते हैं | इसलिए ज़रूरी है कि आप हर रोज़ अपने दिन की शुरुआत ज़बरदस्त तरीके से करें | हम आज आपको अपने दिन को शुरू करने के 10 बिंदु बता रहे हैं जो आपके जीवन को सफलता की ओर ले जाते हैं :

1. सुबह का आरंभ धन्यवाद से करें:
आपको अपना दिन सकारात्मक भावना और कृतज्ञता के भाव के साथ शुरू करना चाहिए | आपके पास जो भी है उसके लिए आपको कृतज्ञ होना चाहिये | आप इस बात के लिए भी ईश्वर को धन्यवान दे सकते हैं कि उन्होंने आपको जीने के लिए एक और दिन दिया है | इससे आपकी मानसिक स्थिति सकारात्मक रहेगी |

2. लक्ष्य तय करें और योजना बनाएं:
सफलता के लिए आपको अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से जानना चाहिए और उन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक योजना बनानी चाहिए। सभी सफल लोग अपने दिन की शुरुआत एक योजनाबद्ध तरीके से करते हैं |

3. सुबह का समय प्रबंधित करें:
समय महत्वपूर्ण है और विशेषकर सुबह के समय को सही तरीके से प्रबंधित किया जाना चाहिये | एक सफल और असफल दोनों ही व्यक्तियों के पास एक दिन में 24 घंटे का ही समय होता है | यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने समय का प्रबंधन किस प्रकार करते हैं | इसलिए, समय का सही उपयोग बड़े लक्ष्यों को हासिल करने में बहुत मदद करता है |

4. ध्यान और साधना का समय निकालें:
सुबह के समय थोड़ा ध्यान और साधना अवश्य करें | ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और ऊर्जा मिलती है | इससे आपको ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है और प्रकृति के साथ आपका बेहतर तालमेल बना रहता है | प्रतिदिन ध्यान करने से आप अपने लक्ष्यों पर फोकस कर पाते हैं |

5. स्वास्थ्य का रखें ध्यान:
सफलता के पथ पर आपका शरीर एक महत्सवपूर्ण साधन है | सफलता प्राप्त करने के लिए आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिये | हमारे वेदों में जीवन का प्रथम सुख भी स्वस्थ शरीर को ही बताया गया है | नियमित व्यायाम, योग और सही आहार के माध्यम से हमें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिये |

6. नई चुनौतियों का करें सामना:
सफलता कभी भी स्वयं चलकर आपके पास नहीं आती है | सफलता पाने के लिए हमें चुनौतियों की बाधाओं को पार करना ही पड़ता है | इसलिए हमें कभी भी चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिये और उनका सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिये । इससे आपकी क्षमताओं में सुधार होता है और आपके व्यक्तित्व का विकास होता है |

7. अपने व्यक्तिगत का करें विकास:
हमें प्रतिदिन अपने व्यक्तित्व विकास पर ध्यान अवश्य देना चाहिये | किसी दूसरे से अपनी तुलना करने से बेहतर है कि रोज अपने व्यक्तित्व में थोड़ा सुधार किया जाये | हर दिन कुछ नया सीखें, अच्छी किताबें पढ़ें, अच्छे विडियो देखें, सफल लोगों के बारे में जानें, अपने आसपास या संपर्क के सफल लोगों से बात करें, और अपने व्यक्तिगत विकास पर काम करें।

8. सकारात्मक बनाएं अपनी सोच:
सकारात्मक सोच आपको सकारात्मक निर्णयों की ओर लेकर जाती है, सकारात्मक निर्णय - सकारात्मक कार्यों की ओर, तथा सकारात्मक कार्य आपको सकारात्मक परिणामों की ओर लेकर जाते हैं | इसलिए हमें अपने दिन की शुरुआत सकारात्मक विचारों से करनी चाहिये | इससे हमारे आत्मविश्वास में उन्नति होती है और हम अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं |

9. अपनायें अच्छी आदतें:
वास्तव में सफलता एक दिन का कोई जादुई करिश्मा नहीं, बल्कि प्रतिदिन की हमारी अच्छी आदतों का परिणाम होती है। सुबह की शुरुआत में अच्छी आदतें बनाने पर ध्यान दें, जैसे कि अपना बिस्तर स्वयं ठीक करना, चीज़ों को व्यवस्थित रखना, किताब पढ़ना, देश दुनियाँ में हो रही घटनाओं के प्रति जागरूक रहना, मेडिटेशन करना, पार्क में टहलना, खेल खेलना, व मधुर संगीत सुनना आदि ।

10. अपने लक्ष्यों के प्रति रहें प्रतिबद्ध:
प्रतिदिन सुबह अपने लक्ष्यों की प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएँ, प्रतिदिन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी ऊर्जा, संसाधन और सामर्थ्य को समर्पित करने का संकल्प लें | संकल्प में बहुत बल होता है और संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता | इससे आप नये आयाम स्थापित करते हैं और सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुँचते हैं |

जीवन में आप सफल बनें और अपने जीवन को सार्थक बना सकें, इन्हीं शुभकामनाओं सहित....

सादर



प्रवीण चौधरी
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन
Email: praveen@vyaapak.org
Website: www.vyaapak.org
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Wednesday, November 1, 2023

कहीं आप भी तो नहीं कमजोर इंसान? ऐसे करें पहचान

जीवन एक युद्ध है और इतिहास ने हमें सिखाया है कि युद्ध को केवल शक्ति से जीता जा सकता है | परन्तु कैसी शक्ति? शारीरिक, मानसिक या फ़िर किसी अस्त्र-शस्त्र की शक्ति | जीवन के संघर्ष को जीतने के लिए किसी भी बाहरी बल से ज्यादा महत्वपूर्ण है 'आत्मबल' | जिन लोगों में आत्मबल की कमी होती है उन्हें समाज में आमतौर पर कमजोर, कायर, या डरपोक माना जाता है | आइए, आज हम इंसान की उन आदतों के बारे में जानते हैं, जो उसे कमजोर बनाती हैं |

कमजोर या डरपोक व्यक्ति के लक्षण:

1. हमेशा दूसरों को दोषी ठहराना

कमजोर लोग अपनी हर समस्या के लिए हमेशा दूसरों को दोषी ठहराते हैं | वह अपने साथ होने वाली हर अच्छी-बुरी घटना के लिए दूसरों को दोषी बताते हैं | वह अपने कर्मों की जिम्मेदारी खुद उठाने की बजाय उन्हें अपने परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी, मित्र, प्रशासन, सरकार या नीतियों पर डाल देते हैं | वास्तव में यह अपनी जिम्मेदारियों से बचने और अपनी कमजोरी को छुपाने का एक तरीका होता है |     

2. स्वयं को पीड़ित बताना 

कमजोर लोगों को स्वयं को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत करने में बहुत आनंद आता है | वह दूसरों के सामने अपना रोना-धोना करके यह सिद्द करने में लगे रहते हैं कि वह पीड़ित हैं और उनके साथ बहुत बुरा हुआ है | वास्तव में, अपने आप को पीड़ित बताकर वह हमेशा दूसरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने और उनकी सहानुभूति प्राप्त करने में लगे रहते हैं | 

3. दूसरों से ईर्षा करना 

कमजोर लोग जब जीवन में स्वयं प्रगति नहीं कर पाते, तो वह दूसरों की प्रगति को भी सहन नहीं कर पाते | वह निरर्थक ही दूसरों से अपनी तुलना करने लगते हैं | वह दूसरों को आगे बढ़ता देखकर, व्यर्थ ही उनसे ईर्षा करने लगते हैं | वह स्वयं की प्रगति पर ध्यान न देकर, दूसरों की कमी निकालने में ही सारा समय बर्बाद कर देते हैं | 

4. अपने निर्णय स्वयं न ले पाना 

कमजोर लोग अपने निर्णय लेने में हमेशा कतराते हैं | वह हमेशा अपने छोटे-छोटे निर्णय भी दूसरों के सहारे ही लेते हैं | ऐसा नहीं होता कि वह निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते हैं, बल्कि वह परिणाम से घबराते हैं | उन्हें लगता है कि यदि कुछ गलत हो गया तो वह आसानी से दोष किसी और के ऊपर डाल देंगे | वह बन्दूक हमेशा दूसरों के कन्धों पर रखकर चलाना चाहते हैं |

5. सदैव दूसरों पर आश्रित रहना 

कमजोर लोग हर काम के लिए दूसरों पर आश्रित रहते हैं | वह अकेले चलने का साहस ही नहीं जुटा पाते हैं | वह हर काम को करने के लिए दूसरों का साथ लेते हैं | किसी से सहायता माँगने में कोई बुराई नहीं है, परन्तु वह उन कामों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं, जिन्हें वह स्वयं भी कर सकते हैं |

हम सभी इंसान हैं और हममें से कोई भी सर्वगुण संपन्न नहीं है | हम सभी में कोई न कोई छोटी-बड़ी कमी होती ही है | समझदारी इसी में है कि हम अपनी कमियों को पहचानें और प्रतिदिन उनमें सुधार करें | 

सादर 


प्रवीण चौधरी 
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन 
Email: praveen@vyaapak.org
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Saturday, January 14, 2023

ज़िन्दगी की पाठशाला #15 - जादू


जादू का नाम सुनते ही हम सभी रोमांच से भर जाते हैं और बच्चों के तो क्या कहने? उनके भीतर तो उत्साह की लहर दौड़ जाती है और चेहरे खिल उठते हैं | जादू की दुनियाँ भी अजब-ग़जब दुनियाँ है, जहाँ हर चेहरे पर ख़ुशी होती है, हर ख्वाहिश पलक झपकते ही पूरी हो जाती है, ज़िन्दगी बहुत आसान होती है और ग़म का तो दूर दूर तक कोई नामोंनिशान नहीं होता | हम में से हर कोई चाहता है कि काश जादू की कोई छड़ी हमारे हाथ लग जाए, जिससे हर मनचाही चीज़ को आसानी से पाया जा सके | जादू की दुनियाँ रोमांचित तो बहुत करती है, पर क्या असल ज़िन्दगी में ऐसा सब कुछ मुमकिन है?

अभी हाल ही में मुझे अपने परिवार के साथ विश्वप्रसिद्ध जादूगर O.P. शर्मा (जूनियर) के शो में जाने का मौका मिला | हालाँकि शुरुआत में मैं इस कार्यक्रम में जाने का बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं था, पर बच्चों की ज़िद थी इसलिए जाना पड़ा | आमतौर पर व्यस्क होने पर हम कुछ ज्यादा ही तार्किक हो जाते हैं और हमें लगता है कि जादू जैसी कोई चीज़ नहीं होती है, और यह आँखों के धोखे से ज्यादा और कुछ नहीं है | बहरहाल, जादू का शो आशा से कहीं अधिक मनोरंजक, मज़ेदार और ज्ञानवर्धक रहा | कार्यक्रम में बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता भी इसका भरपूर आनंद उठा रहे थे | जादूगर ने अपनी बेहतरीन कला का प्रदर्शन किया और दर्शकों का मन मोह लिया | मैंने भी अपने परिवार के साथ इस शो का न सिर्फ आनंद उठाया बल्कि अपनी आदत के अनुसार इससे कुछ ज्ञानवर्धक बिंदु भी उठा लिए, जिन्हें मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ |

1. महारथी बनने में लगता है समय 

जादूगर O.P. शर्मा (जूनियर) ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि वह अभी तक 40 हजार से अधिक शो आयोजित कर चुके हैं | हम में से कुछ लोगों को लगता है कि शिखर पर पहुँचना बहुत आसान है | परन्तु वास्तविकता तो यह है कि किसी भी क्षेत्र में महारथ हासिल करने के लिए बहुत और शायद बहुत ज्यादा अभ्यास की ज़रुरत होती है | किसी भी फील्ड में एक्सपर्ट बनने के लिए बहुत ज्यादा प्रैक्टिस करनी पड़ती है और आमतौर पर इसमें एक लम्बा समय लगता है | इसलिए, किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने और सफलता की ऊँचाई तक पहुँचने के लिए निरंतर अभ्यास और धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है |

2. मेहनत का कोई विकल्प नहीं 

जादू का यह शो महीनों तक बिना किसी छुट्टी के लगातार चलता है और प्रतिदिन इसके तीन शो आयोजित किये जाते हैं | इससे स्पष्ट पता चलता है कि जीवन में किसी भी बड़ी सफ़लता को प्राप्त करने और उसे बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है | और जीवन में मेहनत का कोई विकल्प नहीं हो सकता | सोचिये, अगर सफलता पाना जादू की छड़ी घुमाने जितना ही आसान होता, तो फ़िर किसी जादूगर को इतनी कड़ी मेहनत करने की कोई ज़रुरत ही नहीं होती | इसलिए, जीवन में वास्तविक परिणाम हासिल करने के लिए जितनी मेहनत ज़रूरी है, उतनी करनी ही पड़ेगी | सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है और मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है |

3. टीम वर्क है ज़रूरी 

किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करना एक अकेले के बस की बात नहीं होती, बल्कि इसके लिए टीम वर्क बहुत ज़रूरी होता है | इस कार्यक्रम के दौरान मैंने देखा कि इतना बड़ा और सफल आयोजन एक टीम के भरोसे ही हो सकता है | कार्यक्रम में सिक्यूरिटी गार्ड, कार पार्किंग, टिकट काउंटर, मेंटेनेंस, म्यूजिक, लाइटिंग, मार्केटिंग, सोशल मीडिया, कैटरिंग, हाउस कीपिंग, स्नैक्स काउंटर, मैजिक बॉक्स काउंटर, और स्टेज पर मौजूद अन्य सहयोगियों और कलाकारों की मेहनत और आपसी तालमेल के बिना इस प्रकार का बड़ा और सफल आयोजन संभव ही नहीं है | इसमें हर एक टीम मेम्बर का अपना एक विशेष महत्व है | ज़िन्दगी में जो लोग कहते हैं कि वह स्वयं के दम पर ही सफल हुए हैं, वह निश्चित रूप से पूर्ण सत्य नहीं बता रहे हैं | सच्चाई तो यह है कि हमें इस दुनियाँ में आने, जीवन चलाने, और दुनियाँ से जाने के लिए भी हमेशा दूसरों की ज़रुरत पड़ती है | इसलिए बड़ी कामयाबी पाने के लिए एक बेहतरीन टीम का होना ज़रूरी है |

4. लीड करने वाला ही बनता है लीडर 

इस कार्यक्रम के आयोजन में यूँ तो सैकड़ों लोग अपना सहयोग दे रहे थे, परन्तु मुख्य रूप से चेहरा तो जादूगर O.P. शर्मा (जूनियर) का ही दिखाई दे रहा था | इसी तरह हम जब भी मोदी जी या योगी जी जैसे किसी बड़े चेहरे की बात करते हैं तो एक पल के लिए हम भूल जाते हैं कि उनके साथ एक बहुत बड़ी टीम काम कर रही है और उनको सहयोग कर रही है | लेकिन जिसमें टीम को लीड करने की क्षमता होती है, वही अपने आप को लीडर के रूप में स्थापित कर पाता है |

वैसे सबसे बड़ा जादूगर तो ऊपर वाला है, जो चमत्कार करने के लिए अपनी छड़ी लेकर तैयार बैठा है | लेकिन उसकी एक शर्त है कि वह अपनी जादू की छड़ी केवल उन लोगों पर ही घुमाता है, जो अपने निर्धारित लक्ष्य के प्रति पूर्णरूप से समर्पित हैं और सही रणनीति के साथ उपलब्ध संसाधनों का भरपूर उपयोग करते हुए कड़ी मेहनत करते हैं | 

सादर 


प्रवीण चौधरी 
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Thursday, March 31, 2022

बच्चे और राजनीति

#सच्ची_घटना_पर_आधारित

कौन कहता है कि बच्चों को राजनीति की समझ नहीं होती? बल्कि आज जिस घटना का विश्लेषण हम करने जा रहे हैं, उससे पता चलता है कि बच्चों में भी राजनीति की भरपूर समझ विकसित है | आपको बता दूँ कि यह विश्लेषण आज घटित हुई एक सच्ची घटना पर आधारित है | मेरा बेटा अभी प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है | किसी कारण से कल वह स्कूल नहीं जा पाया था | आज जब वह स्कूल गया तो उसने कल का अधूरा काम पूरा करने के लिए आस-पास बैठने वाले अपने दोस्तों से मदद माँगी | उसने कहा कि क्या कोई मुझे अपनी कॉपी दिखा देगा, जिससे मैं कल का छूटा हुआ काम पूरा कर सकूँ | इस पर एक लड़की ने तुरंत जवाब दिया कि अपनी कॉपी तो मैं तुझे दिखा दूँगी, पर मेरी एक शर्त है | दोस्तों, आपको शायद यकीन नहीं होगा, पर उस छोटी सी बच्ची ने एक बड़ी ही विचित्र शर्त मेरे बेटे के सामने रख दी | उसने कहा कि "मेरी कॉपी के बदले में एक महीने बाद मई में होने वाले क्लास मॉनिटर (class monitor) के इलेक्शन में तुझे मेरे लिए वोट करना होगा" | सोचिये, एक छोटी सी बच्ची का ऐसा राजनीतिक प्रस्ताव |

बार्टर सिस्टम (barter system) पर आधारित छोटा-मोटा लेनदेन तो बच्चों में पहले भी हुआ करता था | जैसे कि बच्चों का आपस में खाना या टॉफी आदि एक्सचेंज करना | लेकिन आज बात आगे बढ़ चुकी है | बच्चे किसी वस्तु के बदले दूसरी वस्तु नहीं, बल्कि वोट माँगते हैं | "नोट के बदले वोट" तो आपने कई बार सुना होगा, परन्तु "नोट-बुक" के बदले वोट माँगे जा रहे हैं, गजब! विश्लेषण करने वाली बात यह है कि बच्चे यह सब बातें कहाँ से सीख रहे हैं, और आखिर बच्चों में ऐसी समझ को विकसित करने के लिए कौन ज़िम्मेदार है | सोचने वाली बात यह भी है कि इस प्रकार की मानसिकता के साथ बच्चों का भविष्य क्या होगा और समाज किस दिशा में जायेगा |

कहाँ से विकसित होती है बच्चों में इस प्रकार की मानसिकता?

निश्चित रूप से कहना तो कठिन है, परन्तु बच्चों में इस प्रकार की मानसिकता विकसित होने के कुछ कारण जो समझ आते हैं, वह हैं:

-    प्रारम्भिक स्तर पर माता-पिता द्वारा अक्सर बच्चों को एक निश्चित काम करने या पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने और अच्छा रिजल्ट लाने के बदले में कोई गिफ्ट या उनकी कोई माँग पूरी करने का वादा किया जाता है | इससे बच्चे के मन में यह बात बैठ जाती है कि हर काम की एक कीमत होती है |

- कई बार टीवी और अन्य संचार माध्यमों से बच्चे को यह बात समझ आती है कि लालच देकर कोई भी काम करवाया जा सकता है |

- वर्तमान में तो राजनीतिक पार्टियों ने यह साबित भी कर दिया है कि मुफ्त बिजली पानी और अन्य सुविधाओं का लालच देकर सत्ता हासिल की जा सकती है |

आज के इस घटनाक्रम से हमारे बच्चों के भविष्य को लेकर कुछ गंभीर प्रश्न खड़े हो जाते हैं, जैसे कि:

- क्या इस प्रकार की मानसिकता के साथ बड़े होने पर हमारे बच्चों में भ्रष्टाचार के प्रति सहजता और स्वीकार्यता नहीं बढ़ जाएगी?

- क्या ऐसी मानसिकता के साथ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास हो पायेगा?

- क्या ऐसी मानसिकता के साथ बच्चे निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद पर पाएँगे?

- क्या इस प्रकार की मानसिकता के साथ बड़े हुए बच्चे अपने माता-पिता की सेवा कर पाएँगे? 

- क्या इस तरह की मानसिकता के साथ बड़े हुए बच्चे समाज में अपने योगदान दे पाएँगे?

- क्या इस प्रकार की मानसिकता लिए बच्चे देश के निष्ठावान नागरिक बन पाएँगे? 

प्रश्नों की यह लिस्ट बहुत बड़ी हो सकती है | लेकिन, एक बात तय है कि यह सभी प्रश्न महत्वपूर्ण हैं | अपने परिवार, समाज और देश हित में इस बात का चिंतन ज़रूरी है कि ऐसी मानसिकता के साथ हमारा भविष्य क्या होगा | सोचिये, जब हमारा बच्चा देखता है कि छोटे-छोटे लालच देकर हमारे वोट खरीदे जाते हैं, लालच में आकर हम भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं, हम सच का साथ नहीं देते और झूँठ के पीछे छिपकर खड़े हो जाते हैं, तो हमारा बच्चा हमसे यही सब तो सीखेगा | 

जिस प्रकार आम की गुठली बोने के बाद उससे अमरुद का वृक्ष नहीं उग सकता | ठीक उसी प्रकार जैसे संस्कार बच्चे के दिए जाएँगे, भविष्य में वही उसके व्यक्तित्व में परिलक्षित होंगे | सतर्क रहें और ध्यान रखें कि आप किस प्रकार के बीज बो रहे हैं !

सादर 


प्रवीण चौधरी 
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Monday, January 31, 2022

ज़िन्दगी की पाठशाला #14 - पेन (Pen)


 

एक ऐसा स्कूल जो 24 घंटे खुला रहता है | जी हाँ, वह है ज़िन्दगी की पाठशाला, जो 24x7 खुली रहती है और पढ़ाई चलती रहती है | ज़िन्दगी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप सीख रहे हैं या नहीं, क्योंकि उसकी पाठशाला में तो करोंड़ों-अरबों विद्यार्थी हैं | यूँ तो ज़िन्दगी सभी को सीखने के समान अवसर देती है, परन्तु सीख वही रहा है जो ध्यान लगा रहा है | और जिसका ध्यान भटक रहा है, वह केवल अपना समय ही पूरा कर रहा है |  

    आज मेरा बेटा मेरे पास आया और शिकायत करने लगा कि उसका बॉल पेन (Ball Pen) चल नहीं रहा है | जब मैंने लिखकर देखा तो पेन ठीक से काम कर रहा था | बेटे ने फ़िर शिकायत की, कि अभी तो नहीं चल रहा था | जब मैंने परिस्थिति को ध्यान से समझा तो पाया कि उसका लिखने का तरीका ही गलत था | वह पेन के पॉइंट को ऊपर की ओर करके लिखने का प्रयास कर रहा था | मैंने उसे समझाया कि पेन के पॉइंट को नीचे की ओर रखो और पेन को थोड़ा झुकाकर लिखो | इस तरह लिखने से पेन पर तुम्हारा नियंत्रण भी बना रहेगा और तुम्हारी लिखाई भी सुन्दर होगी | 

    यह सब पास में बैठी मेरी बड़ी बेटी भी देख रही थी | वह अपने छोटे भाई की नादानियों पर हँसने लगी और बोली कि 'भाई, दीवार के ऊपर कॉपी लगाकर पेन से कोई लिखता है क्या? अगर पेन को ऐसे ही टेढ़े-मेढ़े करके लिखना है, तो अच्छा होगा कि पेंसिल का इस्तेमाल कर ले | पेंसिल किसी भी एंगल Angle में बढ़िया चलेगी |' बेटी की यह बात सुनकर मेरे दिमाग में 3 idiots मूवी का वह सीन आ गया कि जब प्रोफेसर बच्चों को एस्ट्रोनॉट वाला पेन दिखाता है, और मैं मुस्कुराने लगा | 

    लेकिन, इसके बाद मेरे बेटे ने जो जवाब दिया उसने मेरे दिमाग के दरवाजे खोल दिए | वह बोला कि मुझे कॉपी के ऊपर लगी 'नेम चिट' पर अपनी डिटेल्स भरनी हैं, अगर पेंसिल से लिखुँगा तो कोई भी रबड़ से मिटा देगा | यह वास्तव में एक ज़बरदस्त वाक्य था, जिसने मुझे इस विषय पर मंथन करने के लिए प्रेरित किया | जब मैंने इस पर गहराई से सोचा और ज़िन्दगी से जोड़ कर देखा तो मुझे निम्नलिखित कुछ बातें समझ में आईं :-

1. जब पेन को नीचे की ओर करके और थोड़ा झुकाकर चलाते हैं, तो वह बिना रुके ठीक प्रकार से काम करता है | ऐसे ही जिस व्यक्ति का स्वाभाव विनम्र है, वह बेकार की बातों में नहीं फँसता, बल्कि अपना काम करके और बिना रुके आगे की ओर बढ़ जाता है |

2. जब पेन को ऊपर की ओर करके चलाते हैं तो उसकी स्याही उसके पॉइंट से दूर हो जाती है और वह कम या गड़बड़ चलने लगता है, और धीरे-धीरे पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है | ठीक उसी प्रकार जब मनुष्य अपनी प्रतिभा, गुणों और सौंदर्य आदि पर अहंकार करने लगता है, तो वह सभी गुण भी उससे दूर होने लगते हैं | और धीरे-धीरे ऐसे मनुष्य के प्रदर्शन और व्यक्तित्व कर ह्रास होने लगता है | 

3. प्रथम दृष्टि में यह बात आकर्षक जान पड़ती है कि पेंसिल से किसी भी एंगल में लिखा जा सकता है और पेंसिल से लिखे हुए को आसानी से मिटाकर ठीक किया जा सकता है, यानी कि गलतियों को आसानी से सुधारा जा सकता है | लेकिन यह बात भी सत्य है कि पेंसिल से लिखे हुए की सत्यता पर हमेशा संदेह बना रहता है और उसकी विश्वसनीयता भी कम होती है | शायद इसीलिए बैंक के चेक (cheque) पर कभी कोई पेंसिल से हस्ताक्षर नहीं करता | इसी प्रकार सुलझे हुए, गहरे चिंतन वाले, विनम्र, गंभीर और निष्ठावान लोगों के कथन पर हम अधिक विश्वास करते हैं, जबकि हल्के लोगों की बातों को हर कोई हल्के में ही लेता है |

    जिस प्रकार पेन के पॉइंट को जब नीचे की ओर रखते हैं और थोड़ा झुकाकर चलाते हैं, तो लिखाई सुन्दर आती है और पेन पर हमारा मज़बूत नियंत्रण भी बना रहता है | उसी प्रकार, जीवन में जो व्यक्ति नीचे की ओर ज़मीन से जुड़ा (down to earth) रहता है और विनम्रभाव से थोड़ा झुककर चलता है, वही अपने जीवन को सार्थक बना पाता है | इन गुणों से उसके व्यक्तित्व का विकास होता है और वह दूसरों को भी प्रेरित करता है | 

    मैं यहाँ स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि विनम्रता का अर्थ, गलत के सामने झुकना बिलकुल भी नहीं है | किसी व्यक्ति या परिस्थिति के सामने कितना झुका जाये, इसका एक साधारण सा गणित है | हम सभी ने गणित में कोण अवश्य पढ़े होंगे | किसी के भी सामने "अपने स्वाभिमान के कोण की सीमा तक ही झुकना चाहिये, उससे अधिक नहीं", फ़िर सामने वाला चाहे कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो, परिस्थिति या समाज | परन्तु स्मरण रहे कि विनम्रता का यह गणित केवल भौतिक जगत तक ही सीमित है |

    विनम्रता एक सद्गुण है, इसे अपने आचरण में अवश्य विकसित करें | लेकिन, किसी के सामने इतना भी न झुकें कि आप स्वयं अपनी नज़रों में गिर जाएँ |  

सादर 


प्रवीण चौधरी 
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Sunday, December 19, 2021

ज़िन्दगी की पाठशाला #13 - दीपक



मेरे घर से कुछ दूरी पर एक मंदिर है | मैं हर शनिवार को वहाँ शनिदेव के मंदिर में दीपक जलाने जाता हूँ | कल शाम जब मैं मंदिर में पहुँचा, तब वहाँ श्रद्धालुओं की थोड़ी भीड़ लगी हुई थी | कुछ देर लाइन में लगने के बाद मेरा नंबर आया | जब मैं शनिदेव के श्री विग्रह के सम्मुख दीपक जलाने लगा, तो मैंने देखा कि वहाँ पहले से बहुत सारे दीपक जल रहे थे और दीपक रखने वाला स्थान लगभग भर चुका था | तभी एक व्यक्ति ने अचानक बुझे हुए दीपकों को उठाकर एक कोने में फेंकना शुरू कर दिया | उसके ऐसा करने से तुरंत नये दीपक जलाने के लिए रिक्त स्थान बन गया | मैं उन्हें देखकर थोड़ा मुस्कुराया और शनिदेव की पूजा अर्चना करने लगा |

जब मैं मंदिर से वापिस अपने घर की ओर आ रहा था, तब मंदिर की घटना ही मेरे दिमाग में चल रही थी | जैसा कि मैं हमेशा कहता हूँ कि ज़िन्दगी हर पल हमें कुछ नया सिखाती है, पर सीखता वही है जो सूक्ष्मता से घटनाओं का अवलोकन करता है | जब इस घटना को मैंने ज़िन्दगी से जोड़ कर देखा तो मुझे कुछ बातें सीखने को मिलीं :

1. दीपक जब तक जलता है, वह दूसरों को रोशनी देता रहता है | इसी तरह हमें भी प्रयास करना चाहिये कि हम जब तक इस दुनियाँ में रहें, दूसरों की ज़िन्दगी में रोशनी करते रहें | 

2.  जब तक दीपक जलता रहता है, उसका महत्व बना रहता है | जब दीपक बुझ जाता है, तब वह महत्वहीन एवं अर्थहीन हो जाता है | इसलिए हमें भी अपने परिवार, ऑफिस, समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहना चाहिये | जब तक हमारी उपयोगिता बनी रहेगी, तब तक हमारा महत्व भी बना रहेगा |

3. जब तक दीपक जलता है, वह गर्म रहता है | उससे हाथ जलने का खतरा होता है और इसीलिए उसे कोई नहीं छेड़ता | परन्तु जब दीपक बुझ जाता है, तो एक नन्हा सा बच्चा भी उसे उठाकर साइड में फेंक देता है | ठीक इसी प्रकार, जब तक हमारी आशा रुपी लौ जल रही है, हमें कोई महत्वहीन महसूस नहीं करवा सकता | भले ही हम जीवन में कठनाईयों से गुजर रहे हों, जीवन के न्यूनतम आर्थिक स्तर पर हों, हमारी नौकरी छुट गई हो, व्यवसाय में घाटा हो गया हो, उसके बावजूद अगर हमने उम्मीद नहीं खोई है तो हम फ़िर से नई ऊँचाइयों पर पहुँच सकते हैं | 

4. भले ही दीपक किसी कारण से बुझ जाए, पर अगर उसमें तेल भरा हुआ है तो उसे फ़िर से जलाया जा सकता है | उसी तरह, अगर हमारे भीतर भी इच्छाशक्ति रुपी तेल भरा हुआ है, तो आशा और अवसर रुपी माचिस से उसे पुनः प्रज्वलित किया जा सकता है | और जीवन को प्रकाशमय किया जा सकता है | लेकिन जिस आदमी में इच्छाशक्ति रुपी तेल ही ख़त्म हो जाता है, फ़िर भले ही उसे कितने अवसर दे दिए जायें, तो भी उसके भीतर आग नहीं जलाई जा सकती और उसके जीवन को दोबारा रोशन नहीं किया जा सकता |

इसलिए, सदैव अपने पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों का निर्वहन करते रहिये, अपने महत्व को बनाये रखिये, अपने भीतर इच्छाशक्ति रुपी तेल को भरे रखिये, अपनी आशा रुपी लौ को जलाये रखिये, दूसरों की प्रगति में सहायक बनते रहिये, मुस्कुराइये और मुस्कुराहट बाँटते रहिये | और याद रखिये,

दीपक दूसरों से नहीं जलता, वह तो दूसरों के लिए जलता है |


सादर 


प्रवीण चौधरी 
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन 
praveen@vyaapak.org
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