#सच्ची_घटना_पर_आधारित
कौन कहता है कि बच्चों को राजनीति की समझ नहीं होती? बल्कि आज जिस घटना का विश्लेषण हम करने जा रहे हैं, उससे पता चलता है कि बच्चों में भी राजनीति की भरपूर समझ विकसित है | आपको बता दूँ कि यह विश्लेषण आज घटित हुई एक सच्ची घटना पर आधारित है | मेरा बेटा अभी प्राइमरी स्कूल में पढ़ता है | किसी कारण से कल वह स्कूल नहीं जा पाया था | आज जब वह स्कूल गया तो उसने कल का अधूरा काम पूरा करने के लिए आस-पास बैठने वाले अपने दोस्तों से मदद माँगी | उसने कहा कि क्या कोई मुझे अपनी कॉपी दिखा देगा, जिससे मैं कल का छूटा हुआ काम पूरा कर सकूँ | इस पर एक लड़की ने तुरंत जवाब दिया कि अपनी कॉपी तो मैं तुझे दिखा दूँगी, पर मेरी एक शर्त है | दोस्तों, आपको शायद यकीन नहीं होगा, पर उस छोटी सी बच्ची ने एक बड़ी ही विचित्र शर्त मेरे बेटे के सामने रख दी | उसने कहा कि "मेरी कॉपी के बदले में एक महीने बाद मई में होने वाले क्लास मॉनिटर (class monitor) के इलेक्शन में तुझे मेरे लिए वोट करना होगा" | सोचिये, एक छोटी सी बच्ची का ऐसा राजनीतिक प्रस्ताव |
कहाँ से विकसित होती है बच्चों में इस प्रकार की मानसिकता?
निश्चित रूप से कहना तो कठिन है, परन्तु बच्चों में इस प्रकार की मानसिकता विकसित होने के कुछ कारण जो समझ आते हैं, वह हैं:
- प्रारम्भिक स्तर पर माता-पिता द्वारा अक्सर बच्चों को एक निश्चित काम करने या पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने और अच्छा रिजल्ट लाने के बदले में कोई गिफ्ट या उनकी कोई माँग पूरी करने का वादा किया जाता है | इससे बच्चे के मन में यह बात बैठ जाती है कि हर काम की एक कीमत होती है |
- कई बार टीवी और अन्य संचार माध्यमों से बच्चे को यह बात समझ आती है कि लालच देकर कोई भी काम करवाया जा सकता है |
- वर्तमान में तो राजनीतिक पार्टियों ने यह साबित भी कर दिया है कि मुफ्त बिजली पानी और अन्य सुविधाओं का लालच देकर सत्ता हासिल की जा सकती है |
आज के इस घटनाक्रम से हमारे बच्चों के भविष्य को लेकर कुछ गंभीर प्रश्न खड़े हो जाते हैं, जैसे कि:
- क्या इस प्रकार की मानसिकता के साथ बड़े होने पर हमारे बच्चों में भ्रष्टाचार के प्रति सहजता और स्वीकार्यता नहीं बढ़ जाएगी?
- क्या ऐसी मानसिकता के साथ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास हो पायेगा?
- क्या ऐसी मानसिकता के साथ बच्चे निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद पर पाएँगे?
- क्या इस प्रकार की मानसिकता के साथ बड़े हुए बच्चे अपने माता-पिता की सेवा कर पाएँगे?
- क्या इस तरह की मानसिकता के साथ बड़े हुए बच्चे समाज में अपने योगदान दे पाएँगे?
- क्या इस प्रकार की मानसिकता लिए बच्चे देश के निष्ठावान नागरिक बन पाएँगे?
प्रश्नों की यह लिस्ट बहुत बड़ी हो सकती है | लेकिन, एक बात तय है कि यह सभी प्रश्न महत्वपूर्ण हैं | अपने परिवार, समाज और देश हित में इस बात का चिंतन ज़रूरी है कि ऐसी मानसिकता के साथ हमारा भविष्य क्या होगा | सोचिये, जब हमारा बच्चा देखता है कि छोटे-छोटे लालच देकर हमारे वोट खरीदे जाते हैं, लालच में आकर हम भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं, हम सच का साथ नहीं देते और झूँठ के पीछे छिपकर खड़े हो जाते हैं, तो हमारा बच्चा हमसे यही सब तो सीखेगा |
जिस प्रकार आम की गुठली बोने के बाद उससे अमरुद का वृक्ष नहीं उग सकता | ठीक उसी प्रकार जैसे संस्कार बच्चे के दिए जाएँगे, भविष्य में वही उसके व्यक्तित्व में परिलक्षित होंगे | सतर्क रहें और ध्यान रखें कि आप किस प्रकार के बीज बो रहे हैं !
सादर
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