नूडल्स (Noodles) हम सभी कभी न कभी खाते ही हैं, और बच्चों को तो यह बहुत पसंद होते हैं | आज जब बच्चों को नूडल्स खाते देखा, तो ज़िन्दगी की एक
बड़ी सीख दे गए नूडल्स |
नूडल्स उलझे हुए रहते हैं और खाते समय एक बार में ही चम्मच या कांटे में भर कर आते हैं | कई बार मुँह से बाहर लटकते नूडल्स को कंट्रोल करना भी मुश्किल होता है, पर खाने में मज़ा बड़ा आता है | नूडल्स खाने का एक तरीका यह भी हो सकता है कि नूडल्स को एक–एक करके सुलझा कर खाया जाए | लेकिन एक-एक नूडल को सुलझाने में टाइम बड़ा लगेगा और खाने का मज़ा कहीं खो जाएगा | आप जानते हैं कि एक-एक नूडल खाने में इतना मज़ा नहीं आता जितना मुँह भर उलझी हुए नूडल्स खाने में आता है |
अब अगर ध्यान से देखें, तो हम सब की ज़िन्दगी भी कहीं न कहीं हमेशा नूडल्स की तरह उलझी रहती है
| हम सब के जीवन में छोटी-बड़ी कोई न कोई समस्या बनी रहती है | ज़िन्दगी जीने का एक तरीका तो ये हो सकता है कि हर एक समस्या को हल करने की कोशिश
की जाए | ज़िन्दगी जीने का दूसरा तरीका ये भी हो सकता है कि नूडल्स की तरह मुँह भर के खाया जाए और आनंद लिया जाए |
जिस प्रकार हर उलझी हुई नूडल को सुलझा पाना संभव तो है, पर उन्हें सुलझाने के चक्कर में बहुत समय लगेगा और नूडल्स ठंडी हो जायेंगी और खाने योग्य नहीं बचेंगी | मान लीजिये कि आप उन्हें खा भी लें, फ़िर भी एक बात तो तय है कि मज़ा नहीं आएगा | ठीक उसी तरह, माना कि जीवन की हर समस्या का कोई न कोई संभावित समाधान तो अवश्य है | पर अगर हर एक समस्या को सुलझाने बैठ गए तो आप समय के साथ नहीं चल पाएँगे, कहीं पीछे रह जाएँगे, और जीवन का भरपूर आनंद नहीं उठा पाएँगे |
जैसे नूडल्स में ज़बरदस्त मसाला ना डाला जाए, तो बढ़िया वाला मज़ा नहीं आता | उसी तरह परेशानियाँ भी ज़िन्दगी में मसाले का काम करती हैं | अगर ज़िन्दगी में समस्याएँ और चुनौतियाँ न हों, तो ज़िन्दगी भी बेस्वाद लगती है |
मेरे दोस्त, ज़िन्दगी तो हमेशा उलझी हुई नूडल्स की तरह ही रहेगी | अब आपको तय करना है कि सारा वक़्त इसे सुलझाने में लगाया जाए या मुँह भर के खाया जाए और इसका भरपूर आनंद उठाया जाए |
एक बात कहूँ तो, मान लेना ईश्वर के वास्ते |
श्रद्धा बनाये रखना, खुल जाएँगे बंद रास्ते ||
सादर
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