Tuesday, December 29, 2020

ज़िन्दगी की पाठशाला #5 - नूडल्स

 


नूडल्स (Noodles) हम सभी कभी न कभी खाते ही हैं, और बच्चों को तो यह बहुत पसंद होते हैं | आज जब बच्चों को नूडल्स खाते देखा, तो ज़िन्दगी की एक बड़ी सीख दे गए नूडल्स |

नूडल्स उलझे हुए रहते हैं और खाते समय एक बार में ही चम्मच या कांटे में भर कर आते हैं | कई बार मुँह से बाहर लटकते नूडल्स को कंट्रोल करना भी मुश्किल होता है, पर खाने में मज़ा बड़ा आता है | नूडल्स खाने का एक तरीका यह भी हो सकता है कि नूडल्स को एक–एक करके सुलझा कर खाया जाए | लेकिन एक-एक नूडल को सुलझाने में टाइम बड़ा लगेगा और खाने का मज़ा कहीं खो जाएगा | आप जानते हैं कि एक-एक नूडल खाने में इतना मज़ा नहीं आता जितना मुँह भर उलझी हुए नूडल्स खाने में आता है |

अब अगर ध्यान से देखें, तो हम सब की ज़िन्दगी भी कहीं न कहीं हमेशा नूडल्स की तरह उलझी रहती है | हम सब के जीवन में छोटी-बड़ी कोई न कोई समस्या बनी रहती है | ज़िन्दगी जीने का एक तरीका तो ये हो सकता है कि हर एक समस्या को हल करने की कोशिश की जाए | ज़िन्दगी जीने का दूसरा तरीका ये भी हो सकता है कि नूडल्स की तरह मुँह भर के खाया जाए और आनंद लिया जाए |

जिस प्रकार हर उलझी हुई नूडल को सुलझा पाना संभव तो है, पर उन्हें सुलझाने के चक्कर में बहुत समय लगेगा और नूडल्स ठंडी हो जायेंगी और खाने योग्य नहीं बचेंगी | मान लीजिये कि आप उन्हें खा भी लें, फ़िर भी एक बात तो तय है कि मज़ा नहीं आएगा | ठीक उसी तरह, माना कि जीवन की हर समस्या का कोई न कोई संभावित समाधान तो अवश्य है | पर अगर हर एक समस्या को सुलझाने बैठ गए तो आप समय के साथ नहीं चल पाएँगे, कहीं पीछे रह जाएँगे, और जीवन का भरपूर आनंद नहीं उठा पाएँगे | 

जैसे नूडल्स में ज़बरदस्त मसाला ना डाला जाए, तो बढ़िया वाला मज़ा नहीं आता | उसी तरह परेशानियाँ भी ज़िन्दगी में मसाले का काम करती हैं | अगर ज़िन्दगी में समस्याएँ और चुनौतियाँ न हों, तो ज़िन्दगी भी बेस्वाद लगती है | 

मेरे दोस्त, ज़िन्दगी तो हमेशा उलझी हुई नूडल्स की तरह ही रहेगी | अब आपको तय करना है कि सारा वक़्त इसे सुलझाने में लगाया जाए या मुँह भर के खाया जाए और इसका भरपूर आनंद उठाया जाए |  

एक बात कहूँ तो, मान लेना ईश्वर के वास्ते |

 श्रद्धा बनाये रखना, खुल जाएँगे बंद रास्ते ||

सादर 


प्रवीण चौधरी 
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन 
praveen@vyaapak.org
WhatsApp: 8178983844

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Wednesday, December 16, 2020

ज़िन्दगी की पाठशाला #4 - सड़क और गड्ढे


सड़क और गड्ढे एक दूसरे के पूरक हैं | सड़क पर गड्ढे बिलकुल वैसे ही होते हैं, जैसे किसी मासूम बच्चे को बुरी नज़र से बचाने के लिए उसके चेहरे पर काला टीका लगा दिया गया हो | सरकार चाहे कितने भी बढ़िया हाईवे बनवा दे, पर गड्ढे वाली सड़कों पर चलने का अपना अलग ही मज़ा है | वैसे भी हमारे देश में नई सड़क बनने के बाद, जानते है कि सबसे पहला काम क्या होता है, जी हाँ बिलकुल सही, उसे खोदने वाले चले आते हैं | कौन कहता है कि विभागों में समन्वय की कमी है, एक विभाग सड़क बनाता चलता है और दूसरा पीछे-पीछे उसे खोदता चलता है | अपने यहाँ तो एक मज़ेदार कहावत भी प्रचलित है कि:

यहाँ भी खुदा है, वहाँ भी खुदा है |
जहाँ आज नहीं खुदा है, वहाँ कल खुदेगा ||

बहरहाल, हम सब इस बात से परिचित है कि सड़को पर छोटे-बड़े, कभी-कभी बहुत बड़े, और कभी पानी भरे गड्ढे मिलना एक आम बात है | और हम सभी ने कभी न कभी इन्हें कूदकर पार करने का अनुभव भी किया होगा | कल मेरे साथ भी यही घटना घटित हुई | मैं पैदल ही बाज़ार की ओर जा रहा था कि अचानक से रास्ते में पानी से भरा एक बड़ा गड्ढा आ गया | चूँकि गड्ढा बड़ा था और उसमें पानी भरा था, इसलिए मुझे दो कदम पीछे हटकर तेजी से छलाँग लगा कर उसे पार करना पड़ा | मन में थोड़ा क्रोध आना भी स्वाभाविक था कि किसने सड़क पर इतना बड़ा गड्ढा खोद दिया | प्रशासन और सरकार  लापरवाह है आदि विचार भी मन में आने लगे | तभी मन में विचार आया कि चलो अच्छा हुआ कि छलाँग लगाने के बहाने थोड़ा व्यायाम हो गया | एक बात और दिमाग में आई कि ये गड्ढा तो दिख रहा था पर हमारे जीवन की राह तो न जाने कितने अदृश्य गड्ढों से भरी पड़ी है | कुछ लोग तो हमारी राह में कदम-कदम पर गड्ढे खोदने के लिए ही तैयार बैठे रहते हैं | 

तभी अचानक इस घटना का एक सकारात्मक पहलु भी समझ में आया और गुस्सा कहीं गायब हो गया |  जो लोग हमारी राह में गड्ढे खोदते हैं, वास्तव में वे हमें इस बात का अवसर देते हैं और प्रेरित करते हैं कि हम पूरी शक्ति के साथ साथ छलाँग लगा कर आगे बढ़ जायें | कभी कभार आपको थोड़ा रुकना, विचार करना, और दो कदम पीछे हटना भी पड़ सकता है | पर आखिरकार हम उस बाधा को पार कर ही लेते हैं | और इससे हमें अपनी वास्तविक शक्ति का आभास भी होता है |

तो आज के बाद जो लोग आपके रास्ते में गड्ढे खोदते हैं, आपको उनका धन्यवाद् देना चाहिये | क्योंकि ये आपको जीवन में ऊँची छलाँग लगाने का अवसर और साहस दे रहे हैं |

याद रखिये:

जो व्यक्ति आपकी पीठ पीछे बुराई करता है, वो आपसे दो कदम पीछे है |

जो व्यक्ति आपकी टांग खींचता है, उसका स्तर आपसे नीचे है |

और

जो व्यक्ति आपकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने की कोशिश करता है, निश्चित ही उसकी प्रतिष्ठा आपसे कम है |

तो अगली बार जब आपको रास्ते में कोई गड्ढा मिले, तो गड्ढा खोदने वाले को धन्यवाद् दीजिये, और उसे कूद कर जीवन की राह पर आगे बढ़ जाइये | 


सादर 

प्रवीण चौधरी 
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन 
praveen@vyaapak.org
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