Monday, January 31, 2022

ज़िन्दगी की पाठशाला #14 - पेन (Pen)


 

एक ऐसा स्कूल जो 24 घंटे खुला रहता है | जी हाँ, वह है ज़िन्दगी की पाठशाला, जो 24x7 खुली रहती है और पढ़ाई चलती रहती है | ज़िन्दगी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप सीख रहे हैं या नहीं, क्योंकि उसकी पाठशाला में तो करोंड़ों-अरबों विद्यार्थी हैं | यूँ तो ज़िन्दगी सभी को सीखने के समान अवसर देती है, परन्तु सीख वही रहा है जो ध्यान लगा रहा है | और जिसका ध्यान भटक रहा है, वह केवल अपना समय ही पूरा कर रहा है |  

    आज मेरा बेटा मेरे पास आया और शिकायत करने लगा कि उसका बॉल पेन (Ball Pen) चल नहीं रहा है | जब मैंने लिखकर देखा तो पेन ठीक से काम कर रहा था | बेटे ने फ़िर शिकायत की, कि अभी तो नहीं चल रहा था | जब मैंने परिस्थिति को ध्यान से समझा तो पाया कि उसका लिखने का तरीका ही गलत था | वह पेन के पॉइंट को ऊपर की ओर करके लिखने का प्रयास कर रहा था | मैंने उसे समझाया कि पेन के पॉइंट को नीचे की ओर रखो और पेन को थोड़ा झुकाकर लिखो | इस तरह लिखने से पेन पर तुम्हारा नियंत्रण भी बना रहेगा और तुम्हारी लिखाई भी सुन्दर होगी | 

    यह सब पास में बैठी मेरी बड़ी बेटी भी देख रही थी | वह अपने छोटे भाई की नादानियों पर हँसने लगी और बोली कि 'भाई, दीवार के ऊपर कॉपी लगाकर पेन से कोई लिखता है क्या? अगर पेन को ऐसे ही टेढ़े-मेढ़े करके लिखना है, तो अच्छा होगा कि पेंसिल का इस्तेमाल कर ले | पेंसिल किसी भी एंगल Angle में बढ़िया चलेगी |' बेटी की यह बात सुनकर मेरे दिमाग में 3 idiots मूवी का वह सीन आ गया कि जब प्रोफेसर बच्चों को एस्ट्रोनॉट वाला पेन दिखाता है, और मैं मुस्कुराने लगा | 

    लेकिन, इसके बाद मेरे बेटे ने जो जवाब दिया उसने मेरे दिमाग के दरवाजे खोल दिए | वह बोला कि मुझे कॉपी के ऊपर लगी 'नेम चिट' पर अपनी डिटेल्स भरनी हैं, अगर पेंसिल से लिखुँगा तो कोई भी रबड़ से मिटा देगा | यह वास्तव में एक ज़बरदस्त वाक्य था, जिसने मुझे इस विषय पर मंथन करने के लिए प्रेरित किया | जब मैंने इस पर गहराई से सोचा और ज़िन्दगी से जोड़ कर देखा तो मुझे निम्नलिखित कुछ बातें समझ में आईं :-

1. जब पेन को नीचे की ओर करके और थोड़ा झुकाकर चलाते हैं, तो वह बिना रुके ठीक प्रकार से काम करता है | ऐसे ही जिस व्यक्ति का स्वाभाव विनम्र है, वह बेकार की बातों में नहीं फँसता, बल्कि अपना काम करके और बिना रुके आगे की ओर बढ़ जाता है |

2. जब पेन को ऊपर की ओर करके चलाते हैं तो उसकी स्याही उसके पॉइंट से दूर हो जाती है और वह कम या गड़बड़ चलने लगता है, और धीरे-धीरे पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है | ठीक उसी प्रकार जब मनुष्य अपनी प्रतिभा, गुणों और सौंदर्य आदि पर अहंकार करने लगता है, तो वह सभी गुण भी उससे दूर होने लगते हैं | और धीरे-धीरे ऐसे मनुष्य के प्रदर्शन और व्यक्तित्व कर ह्रास होने लगता है | 

3. प्रथम दृष्टि में यह बात आकर्षक जान पड़ती है कि पेंसिल से किसी भी एंगल में लिखा जा सकता है और पेंसिल से लिखे हुए को आसानी से मिटाकर ठीक किया जा सकता है, यानी कि गलतियों को आसानी से सुधारा जा सकता है | लेकिन यह बात भी सत्य है कि पेंसिल से लिखे हुए की सत्यता पर हमेशा संदेह बना रहता है और उसकी विश्वसनीयता भी कम होती है | शायद इसीलिए बैंक के चेक (cheque) पर कभी कोई पेंसिल से हस्ताक्षर नहीं करता | इसी प्रकार सुलझे हुए, गहरे चिंतन वाले, विनम्र, गंभीर और निष्ठावान लोगों के कथन पर हम अधिक विश्वास करते हैं, जबकि हल्के लोगों की बातों को हर कोई हल्के में ही लेता है |

    जिस प्रकार पेन के पॉइंट को जब नीचे की ओर रखते हैं और थोड़ा झुकाकर चलाते हैं, तो लिखाई सुन्दर आती है और पेन पर हमारा मज़बूत नियंत्रण भी बना रहता है | उसी प्रकार, जीवन में जो व्यक्ति नीचे की ओर ज़मीन से जुड़ा (down to earth) रहता है और विनम्रभाव से थोड़ा झुककर चलता है, वही अपने जीवन को सार्थक बना पाता है | इन गुणों से उसके व्यक्तित्व का विकास होता है और वह दूसरों को भी प्रेरित करता है | 

    मैं यहाँ स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि विनम्रता का अर्थ, गलत के सामने झुकना बिलकुल भी नहीं है | किसी व्यक्ति या परिस्थिति के सामने कितना झुका जाये, इसका एक साधारण सा गणित है | हम सभी ने गणित में कोण अवश्य पढ़े होंगे | किसी के भी सामने "अपने स्वाभिमान के कोण की सीमा तक ही झुकना चाहिये, उससे अधिक नहीं", फ़िर सामने वाला चाहे कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो, परिस्थिति या समाज | परन्तु स्मरण रहे कि विनम्रता का यह गणित केवल भौतिक जगत तक ही सीमित है |

    विनम्रता एक सद्गुण है, इसे अपने आचरण में अवश्य विकसित करें | लेकिन, किसी के सामने इतना भी न झुकें कि आप स्वयं अपनी नज़रों में गिर जाएँ |  

सादर 


प्रवीण चौधरी 
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन 
Email: praveen@vyaapak.org
Website: www.vyaapak.org
WhatsApp : 8178983844
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