यास तूफ़ान की खबर आज सुबह से ही टीवी चैनलों पर बनी हुई है | कोई चैनल बता रहा है कि तेज़ हवाएँ चल रही हैं, कोई तेज आँधी दिखा रहा है, तो कोई तेज बारिश | अभी पिछले सप्ताह भी "ताऊ-ते" तूफ़ान ने भारत के पश्चिमी राज्यों में काफ़ी नुकसान किया | निश्चित रूप से तूफानों के कारण जान-माल की हानि होती है | क्या तूफानों को रोका जा सकता है? शायद नहीं, क्योंकि यह एक प्राकृतिक घटना है | लेकिन यहाँ इससे भी बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या तूफ़ान केवल वही हैं, जो हमें बाहरी दुनियाँ में दिखाई देते हैं, या तूफ़ान हमारे भीतर भी उठते हैं | और क्या तूफ़ान हमें ज़िन्दगी की कुछ सीख दे सकते हैं?
दोस्तों, तूफान केवल बाहर ही नहीं बल्कि समय-समय पर हमारे भीतर भी उठते हैं | और अगर हम बाहर के तूफ़ान को थोड़ा सा ध्यानपूर्वक देखें और समझें तो शायद ये हमें हमारी ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए बहुत बड़ी सीख दे सकते हैं |
जब भी कभी किसी तूफ़ान के आने की सम्भावना होती है, तो प्रशासन द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने की चेतावनी दी जाती है, और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया भी जाता है | तूफ़ान एक प्राकृतिक आपदा है, और ये बहुत शक्तिशाली होते हैं | इसलिए इनका सामना करने में नहीं, बल्कि इनसे बचने में ही समझदारी है | तूफ़ान के दौरान तेज़ हवाएँ चलती हैं, उथल-पुथल मचती है, कुछ स्पष्ट दिखाई नहीं देता और एक भय का वातावरण बन जाता है | ऐसे में न तो स्थिति का सही आंकलन किया जा सकता है और सही निर्णय ले पाना भी कठिन होता है | इसलिए समझदारी इसी में है कि तूफ़ान को गुजर जाने देना चाहिए और उसके शांत होने पर ही अगला निर्णय लेना चाहिए |
बाहर के तूफ़ान की तरह ही हमारे भीतर भी क्रोध रुपी तूफ़ान समय-समय पर आते रहते हैं | क्रोध की स्थिति में हमें कुछ स्पष्ट दिखाई नहीं देता, हमारी बुद्धि क्षीण हो जाती है, सही निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है और वाणी पर नियंत्रण खोने लगता है | ऐसी स्थिति में कोई भी कदम उठाना, तूफ़ान का सामना करने के समान है | जिसमें स्वयं के नुकसान की सम्भावना ज्यादा होती है | इसलिए प्रयास करें कि इस क्रोध रुपी तूफ़ान के शांत हो जाने पर ही अगला कदम उठाएं |
हाँ, यदि आपका क्रोध सही दिशा में है तो क्रोध की उस ऊर्जा को व्यर्थ न जाने दें, उसे संग्रहित करें, उससे आपको बल मिलेगा | इस ऊर्जा का प्रयोग भविष्य में शांत मन से, अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए करें | आइए, इसे एक उदाहरण से समझते हैं | मान लीजिये कि बाहर एक तूफ़ान आया और तेज़ हवाएँ चलीं | उन तेज़ हवाओं का लाभ उठा कर आपने एक पवन चक्की के माध्यम से विद्युत (बिजली) का निर्माण किया और किसी बैटरी को चार्ज करके विद्युत का संग्रह कर लिया | या यूँ कहें कि आपने अपने घर के इन्वर्टर की बैटरी को चार्ज कर लिया | अब, जब भी आपको ज़रुरत हो आप बैटरी की उस ऊर्जा का प्रयोग कर सकते हैं |
एक मज़े की बात यह है कि हमारे अन्दर केवल क्रोध का तूफ़ान ही नहीं आता, बल्कि प्रेम, उत्साह, उमंग, जिज्ञासा, ख़ुशी, दया और करुणा जैसे तूफ़ान भी समय-समय पर उठते रहते हैं | आवश्यकता केवल तूफ़ान को पहचानने और उसकी ऊर्जा हो सही जगह पर प्रयोग करने की है |
आजकल कोरोना महामारी की वजह से बहुत से लोगों को निजी और काम काज से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है | बहुत से लोगों को आर्थिक परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हैं | पहले तो कोरोना और अब फंगस जैसी बिमारियों के कारण चारों ओर भय और अनिश्चितता का वातावरण बना हुआ है | इस महामारी को भी एक तूफ़ान की तरह समझें | आपको निराश होने की नहीं बल्कि स्वयं को सुरक्षित रखने की ज्यादा आवश्यकता है | यह तूफ़ान भी गुजर जायेगा और एक बार फ़िर से सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा |
हाँ, ऊर्जा हो संग्रहित करना और बढ़ाना न भूलें | आप घर पर रहकर भी इन्टरनेट के माध्यम से अपने प्रोफेशन से जुड़ी नॉलेज को बढ़ा सकते हैं, कोई नई स्किल सीख सकते हैं, कोई नया कोर्स कर सकते हैं | आप घर से ही कोई नया व्यापार शुरू कर सकते हैं | व्यायाम, योग, किचन गार्डनिंग, पेंटिंग, म्यूजिक जैसे अपने शौक पूरे कर सकते हैं | कुल मिलाकर, अपने ज्ञान और अपनी ऊर्जा के स्तर को बढाएं ताकि महामारी काल समाप्त होने पर आप दुगनी ऊर्जा के साथ अपने भविष्य के मार्ग पर आगे बढ़ सकें |
अगली बार जब बाहर या आपके भीतर कोई तूफ़ान उठे तो अचेत नहीं, सचेत रहें |
सादर
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन
praveen@vyaapak.org
WhatsApp : 8178983844
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