Tuesday, January 12, 2021

भीड़ से हटकर अपनी अलग पहचान कैसे बनाएं?

 


कहते हैं कि "भीड़ आपको साहस तो देती है, पर पहचान छीन लेती है" | जी हाँ, जब आप भीड़ तंत्र का हिस्सा बन जाते हैं, तो निश्चित रूप से भीड़ आपको ऊर्जा तो देती है, पर एक व्यक्ति विशेष के रूप में आपकी पहचान को आपसे छीन लेती है |

आइए, इसे एक उदाहरण से समझते हैं | पिछले कुछ दिनों से किसान आन्दोलन सुर्ख़ियों में बना हुआ है | आप इस आन्दोलन के पक्ष या विरोध में हो सकते हैं, यह आपका निजी मत है |  मीडिया के माध्यम से आपने ऐसे विडियो अवश्य देखे होंगे जहाँ पर लोग तोड़ फोड़ मचा रहे हैं, मोबाइल टावर को तोड़ रहे हैं, पुलिस वालों पर हमला कर रहे हैं, या गलत बयानबाजी कर रहे हैं और देश के प्रधानमंत्री तक को मारने की बात कर रहे हैं | 

एक बात सोचिये कि जो व्यक्ति पुलिस बल पर ट्रेक्टर चढ़ा रहा है या मोबाइल टावर तोड़ रहा है, या प्रधानमंत्री को मारने की धमकी दे रहा है | अगर वह अकेला होता तो भी क्या ऐसे ही उत्पात मचाता, शायद नहीं | तो फ़िर उसे ऐसा करने का साहस और ऊर्जा कहाँ से मिली? उत्तर स्पष्ट है, उसे यह ऊर्जा भीड़ से मिली |

यह भीड़ आपको कहीं भी मिल सकती है, फ़िर वो चाहें आपका घर हो, ऑफिस हो, या आपका समाज | परन्तु एक बात तो स्पष्ट है कि जब तक आप उस भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे, आप व्यक्ति विशेष के रूप में अपनी पहचान हो स्थापित नहीं कर पायेंगे | अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि क्या आप भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं, या फ़िर भीड़ से अलग हटकर अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहते हैं | 

भीड़ से अलग होने का 20% फार्मूला   

भीड़ से अलग होने का यह फार्मूला बहुत प्रभावशाली है और हर जगह काम करता है | कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से अपना सकता है | इसके लिए आपको अपनी कुछ आदतों में केवल 20% का सुधार करना है | कुछ लोगों को लगेगा कि केवल 20 प्रतिशत सुधार से क्या होगा? ध्यान रखिये, क्रिकेट में शतक 100 रन पर बनता है, 99 पर नहीं | किसी दौड़ में प्रथम (First) और द्वितीय (Second) आने वाले धावक के बीच कई बार एक सेकंड से भी कम का अंतर होता है | इसलिए, एक छोटा सा अंतर भी एक बड़ा प्रभाव पैदा कर सकता है | तो आइये समझते है कि हमें अपनी किन आदतों में सुधार करना है |

1. आपके चलने की गति (चाल)

बात छोटी परन्तु बहुत महत्वपूर्ण है | सोचिए, जब आप किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए कहीं जा रहे होते हैं, तो आपकी गति स्वतः ही सामान्य से थोड़ा अधिक हो जाती है | जब आप अपनी सामान्य गति से थोड़ा तेज़ चलते हैं तो आपका आत्मविश्वास और आपकी ऊर्जा का स्तर बढ़ जाता है  | एक बात यह भी है कि जिस आदमी के पास कोई लक्ष्य नहीं होता, वह आमतौर पर धीरे-धीरे चलता है या टहलता हुआ चलता है | लेकिन जिसके पास कोई लक्ष्य होता है और समय पर कहीं पहुँचना होता है, वह तेज़ी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है | 

इसलिए यह ज़रूरी है कि आप अपने चलने की गति में थोड़ा सुधार करें और उसे केवल 20 प्रतिशत बढ़ा दें, ताकि लोगों को ऐसा भी न लगे कि आप जल्दबाजी में कहीं भागे जा रहे हैं |

2. आपकी आवाज (स्वर) 

बोलते समय अपनी आवाज़ को सामान्य से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दें और थोड़ा सा ऊँची आवाज़ में अपनी बात कहें | जब आप थोड़ा सा ऊँची आवाज़ में बात करते हैं तो सामने वाला का ध्यान आकर्षित कर लेते हैं और वह भी आपकी बात को ध्यान से सुनता है | क्योंकि अब सामने वाला व्यक्ति भी आपको ध्यान से सुन रहा है, इसलिए आप इस बात का भी ध्यान रखें कि आपकी भाषा, शब्दों का चयन और उच्चारण उचित होना चाहिए | मैं ये अवश्य कहना चाहूँगा कि आप अपनी आवाज़ को इतना अधिक भी न बढ़ाएं कि शिष्टता की मर्यादा ही पार हो जाए | 

3. आपके बोलने की गति (रेट ऑफ़ स्पीच)

बात करते समय आप एक मिनट में कितने शब्द बोलते हैं, इसे बोलने की गति या Rate of Speech कहा जाता है | आप अपनी बात कहते समय अपनी रेट ऑफ़ स्पीच को सामान्य से 20 प्रतिशत तक बढ़ा दीजिए | यहाँ कुछ लोगों के मन में प्रश्न उठ सकता है कि अगर तेज़ गति से बोलेंगे, तो क्या दूसरे व्यक्ति को हमारी बात समझ में आएगी | इस प्रश्न का उत्तर मैं आपको कुछ इस तरह देना चाहूँगा कि क्या आपने कभी शंकर महादेवन के गाने सुने हैं ? आपने उनका कोई न कोई गाना अवश्य सुना होगा | गाते समय उनकी रेट ऑफ़ स्पीच सामान्य से बहुत अधिक होती है, फ़िर भी गाने समझ में आते हैं | और यहाँ तो आपको अपनी रेट ऑफ़ स्पीच को सामान्य से केवल 20 प्रतिशत बढ़ाने की बात कही जा रही है | 

यदि आप केवल इन तीन चीज़ों में मात्र 20 प्रतिशत का भी सुधार कर लेंगे, तो आपका व्यक्तित्व निखरने लगेगा | आपकी एक अलग पहचान विकसित होने लगेगी और आप धीरे-धीरे उस सामान्य भीड़ से अलग होने लगेंगे | मैं फ़िर आपसे कहना चाहता हूँ कि जो लोग भीड़ से अलग हो पाते हैं, वास्तव में वे ही अपनी एक अलग पहचान बना पाते हैं | 

"पहचान भले ही छोटी हो, पर अपनी होनी चाहिए |" 

सादर 


प्रवीण चौधरी 
अध्यक्ष, व्यापक फाउंडेशन 
praveen@vyaapak.org
WhatsApp : 8178983844
Telegram: @VyaapakFoundation

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